मेरी थाती ……
51. बड़ा गुरूर था अपने वतनपरस्ती पर...
एक दिन तिलक क्या लगाया, कई आंखें लाल हो गयीं...
सोंचा कि अब टोपी भी पहनी जाये...
लोगों ने बहुरुपिये का तोहमत लगा दिया.... दिलीप कुमार पांडेय।
52. नक्शे कदम कुछ इस तरह बनाये मैने..
हर शख्स खींचा चला आता है...
ख़ुदा की ये ख़ास नेमत है मुझपर...
तंग गलियों में भी घर रोशन है... दिलीप कुमार पांडेय।
53. उसने तो हर कदम पर 'शह' और 'मात' देने में कमी नहीं की...
ये ख़ुद पर यकीन ही था.. रास्ते का कांटा भी हमसफ़र बन गया... दिलीप कुमार पांडेय।
54. तुम साथ थे तो सदियां पलों में सिमटी थीं....
तुम दूर जो गये, हर पल सदी बन गयी है... दिलीप कुमार पांडेय।
55. मिन्नत की, आरजू की, बहुत गुजारिश भी की...
ऐ ज़िंदगी, इतनी मोहलत ना दे...
ख्वामखा.. मौत को भी दुश्मन बना दिया... दिलीप कुमार पांडेय।
56. दर्द जब हद से गुजरता है
होठों पर मुस्कान तैर जाती है
एक मीठा अहसास दिल को छू जाता है
अब खुद से इसे दूर करूं भी तो कैसे
यही तो है, जिसे सिर्फ़ देना आता है.... दिलीप कुमार पांडेय।
57. वक्त ने हौसले पर पहरा लगाया है...
इम्तहान मेरा है तो, कठघरे में वक्त भी है...
देखें टूटता हौसला है, या फिर बदलता.. वक्त है.... दिलीप कुमार पांडेय।
58. सवाल उनका था
ज़माने से मुंह खोला ना गया...
सवाल मेरा भी आया
शोर उठा और 'आह' निकल गयी... दिलीप कुमार पांडेय।
59. सितारों को छूने की ख्वाहिश क्या की...
नींद, चैन सबने साथ छोड़ दिया ।
अभी ख्याल आया है, तो ये हाल है...
मंज़िल आते-आते कहीं जहान ना साथ छोड़ दे... दिलीप कुमार पांडेय।
60. मज़लिस-ए-ग़म की रवायत है...
हर ग़म में खुशी छलकनी चाहिए ।
वो दूर है हमसे तो क्या हुआ...
यादों में नूर बरसना चाहिए... दिलीप कुमार पांडेय।
51. बड़ा गुरूर था अपने वतनपरस्ती पर...
एक दिन तिलक क्या लगाया, कई आंखें लाल हो गयीं...
सोंचा कि अब टोपी भी पहनी जाये...
लोगों ने बहुरुपिये का तोहमत लगा दिया.... दिलीप कुमार पांडेय।
52. नक्शे कदम कुछ इस तरह बनाये मैने..
हर शख्स खींचा चला आता है...
ख़ुदा की ये ख़ास नेमत है मुझपर...
तंग गलियों में भी घर रोशन है... दिलीप कुमार पांडेय।
53. उसने तो हर कदम पर 'शह' और 'मात' देने में कमी नहीं की...
ये ख़ुद पर यकीन ही था.. रास्ते का कांटा भी हमसफ़र बन गया... दिलीप कुमार पांडेय।
54. तुम साथ थे तो सदियां पलों में सिमटी थीं....
तुम दूर जो गये, हर पल सदी बन गयी है... दिलीप कुमार पांडेय।
55. मिन्नत की, आरजू की, बहुत गुजारिश भी की...
ऐ ज़िंदगी, इतनी मोहलत ना दे...
ख्वामखा.. मौत को भी दुश्मन बना दिया... दिलीप कुमार पांडेय।
56. दर्द जब हद से गुजरता है
होठों पर मुस्कान तैर जाती है
एक मीठा अहसास दिल को छू जाता है
अब खुद से इसे दूर करूं भी तो कैसे
यही तो है, जिसे सिर्फ़ देना आता है.... दिलीप कुमार पांडेय।
57. वक्त ने हौसले पर पहरा लगाया है...
इम्तहान मेरा है तो, कठघरे में वक्त भी है...
देखें टूटता हौसला है, या फिर बदलता.. वक्त है.... दिलीप कुमार पांडेय।
58. सवाल उनका था
ज़माने से मुंह खोला ना गया...
सवाल मेरा भी आया
शोर उठा और 'आह' निकल गयी... दिलीप कुमार पांडेय।
59. सितारों को छूने की ख्वाहिश क्या की...
नींद, चैन सबने साथ छोड़ दिया ।
अभी ख्याल आया है, तो ये हाल है...
मंज़िल आते-आते कहीं जहान ना साथ छोड़ दे... दिलीप कुमार पांडेय।
60. मज़लिस-ए-ग़म की रवायत है...
हर ग़म में खुशी छलकनी चाहिए ।
वो दूर है हमसे तो क्या हुआ...
यादों में नूर बरसना चाहिए... दिलीप कुमार पांडेय।
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