मेरी थाती....
41. एक वो चांद है, एक चांद मेरे पास भी है...
खूबसूरत वो भी है, खूबसूरत मेरा चांद भी...
एक जहां को रोशन करता है, उसकी रोशनी मेरे अंदर है...
क्यूं देखूं मैं उस चांद को, जब पास में मेरा चांद है... दिलीप कुमार पांडेय।
42. भिखारी और ग़रीबी का फ़र्क...
किसी ग़रीब की औकात देनेवाला तय करता है...
जबकि भिखारी से देनेवाले की औकात का पता चलता है... दिलीप कुमार पांडेय।
43. तुम ना थे ज़िंदगी में मेरे,
तब भी मैं ज़िंदा था...
तुम हो ज़िंदगी में मेरे,
तब भी मैं ज़िंदा हूं....
फ़र्क बस इतना है...
तब ज़िंदगी, मुझे जीती थी,
आज, मैं ज़िंदगी को जीता हूं.... दिलीप कुमार पांडेय।
44. चंद लम्हे जो पास में वो बैठे...
बहारों से भर गया दामन मेरा;
कल तक अजनबी थे हम...
अब जनम-जनम का साथ लगता है.... दिलीप कुमार पांडेय।
45. हमसफ़र संगदिल हो, तो हर सफ़र आसान होता है...
कदम चूमती है राहें, मंज़िल भी पता देता है... दिलीप कुमार पांडेय।
46. तुम ख़ुद को ख़दा ना समझो...
इंसान हूं मैं...
जाने कब इरादा बदल जाये... दिलीप कुमार पांडेय।
47. रोशन करने में चिराग़ कहां फ़र्क करते हैं...
होश तो हम इंसानों ने खोया है... दिलीप कुमार पांडेय।
48. ये तेरी हुकूमत है कि सलामत है हस्ती मेरी...
वरना इस 'शहर' में कत्ल होना आम बात है... दिलीप कुमार पांडेय।
49. "दोस्ती-यारी" के अब मायने बदल गये हैं...
मतलब निकला तो ठीक, नहीं तो "क़ायदे" बदल गये हैं... दिलीप कुमार पांडेय।
50. एक हो रहे हैं धरती - आसमां
ये वक्त है कुछ ठहरने का
दिन और रात के मिलन का
कैसी लालिमा फैली है चहुं ओर
दुल्हन की तरह रात आ रही है
आओ एक हो जाएं हम भी
इस सुरमई शाम में खो जाएं हम भी..... दिलीप कुमार पांडेय।
41. एक वो चांद है, एक चांद मेरे पास भी है...
खूबसूरत वो भी है, खूबसूरत मेरा चांद भी...
एक जहां को रोशन करता है, उसकी रोशनी मेरे अंदर है...
क्यूं देखूं मैं उस चांद को, जब पास में मेरा चांद है... दिलीप कुमार पांडेय।
42. भिखारी और ग़रीबी का फ़र्क...
किसी ग़रीब की औकात देनेवाला तय करता है...
जबकि भिखारी से देनेवाले की औकात का पता चलता है... दिलीप कुमार पांडेय।
43. तुम ना थे ज़िंदगी में मेरे,
तब भी मैं ज़िंदा था...
तुम हो ज़िंदगी में मेरे,
तब भी मैं ज़िंदा हूं....
फ़र्क बस इतना है...
तब ज़िंदगी, मुझे जीती थी,
आज, मैं ज़िंदगी को जीता हूं.... दिलीप कुमार पांडेय।
44. चंद लम्हे जो पास में वो बैठे...
बहारों से भर गया दामन मेरा;
कल तक अजनबी थे हम...
अब जनम-जनम का साथ लगता है.... दिलीप कुमार पांडेय।
45. हमसफ़र संगदिल हो, तो हर सफ़र आसान होता है...
कदम चूमती है राहें, मंज़िल भी पता देता है... दिलीप कुमार पांडेय।
46. तुम ख़ुद को ख़दा ना समझो...
इंसान हूं मैं...
जाने कब इरादा बदल जाये... दिलीप कुमार पांडेय।
47. रोशन करने में चिराग़ कहां फ़र्क करते हैं...
होश तो हम इंसानों ने खोया है... दिलीप कुमार पांडेय।
48. ये तेरी हुकूमत है कि सलामत है हस्ती मेरी...
वरना इस 'शहर' में कत्ल होना आम बात है... दिलीप कुमार पांडेय।
49. "दोस्ती-यारी" के अब मायने बदल गये हैं...
मतलब निकला तो ठीक, नहीं तो "क़ायदे" बदल गये हैं... दिलीप कुमार पांडेय।
50. एक हो रहे हैं धरती - आसमां
ये वक्त है कुछ ठहरने का
दिन और रात के मिलन का
कैसी लालिमा फैली है चहुं ओर
दुल्हन की तरह रात आ रही है
आओ एक हो जाएं हम भी
इस सुरमई शाम में खो जाएं हम भी..... दिलीप कुमार पांडेय।
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