मेरी थाती।
21. ज़िंदगी की शाम कुछ ऐसे रोशन होगी..
मुमकिन ना था...
पर आप जो आए..
जैसे सुबह ने फिर दस्तक दी हो... दिलीप कुमार पांडेय।
22. साहिल पर खड़े होकर किसे ढुंढता है तू...
ये दरिया.. इश्क का है...
डूबने वाले को हीं ये 'जन्नत' नसीब होती है... दिलीप कुमार पांडेय।
23. मत देख ऐसे, कि नज़र झुक जाए...
आईना है तू मेरा..
मिली जो नज़र..
कहीं राज ना खुल जाए... दिलीप कुमार पांडेय।
24. हर वक़्त सरफ़रोशी की बात करते हो...
क्यों मां को रुलाने की बात कहते हो...
मुजरिम.. ज़माना है, मालूम है मुझे...
पर सज़ा की बात, मुझसे ही करते हो... दिलीप कुमार पांडेय।
25. क़त्ल कर, सीना तान कर चल...
यूं ही, सरताज नहीं बना करते... ।
सर-अंजाम की फिक्र उसे कहां...
जान लेते, तो कफ़न भी ले आते.... दिलीप कुमार पांडेय।
26. दिलों के मिलने की बात ना कीजिए...
ज़माना लेनदेन का है...
बाज़ार-ए-इश्क में खरीदार तो हैं...
क़द्रदानों की बात ना कीजिए... दिलीप कुमार पांडेय।
27. सुलह की हर कोशिश बेकार गयी...
उसके शहर में पनाह ना मिला...
बात जान देने की भी आयी...
पर ना ख़ंजर, ना ही क़त्लगाह मिला... दिलीप कुमार पांडेय।
28. ना मयखाना देखा, ना पैमाने का शौक...
फिर जाने ये बेखबरी क्यों...
होश आया तो मालूम हुआ....
उसकी आंखों में मैंने शराब देखी थी... दिलीप कुमार पांडेय।
29. जाने किस दिशा जाएंगे हम...
आज 'हवा' का मिजाज बदला-बदला सा है... दिलीप कुमार पांडेय।
30. हम दिलों जान से चाहते हैं...
बर्षों तक उन्हें पता ना चला।
ज़ुबां के चंद अल्फ़ाज क्या निकले...
कदमों में वो जहां लुटा बैठे.... दिलीप कुमार पांडेय।
21. ज़िंदगी की शाम कुछ ऐसे रोशन होगी..
मुमकिन ना था...
पर आप जो आए..
जैसे सुबह ने फिर दस्तक दी हो... दिलीप कुमार पांडेय।
22. साहिल पर खड़े होकर किसे ढुंढता है तू...
ये दरिया.. इश्क का है...
डूबने वाले को हीं ये 'जन्नत' नसीब होती है... दिलीप कुमार पांडेय।
23. मत देख ऐसे, कि नज़र झुक जाए...
आईना है तू मेरा..
मिली जो नज़र..
कहीं राज ना खुल जाए... दिलीप कुमार पांडेय।
24. हर वक़्त सरफ़रोशी की बात करते हो...
क्यों मां को रुलाने की बात कहते हो...
मुजरिम.. ज़माना है, मालूम है मुझे...
पर सज़ा की बात, मुझसे ही करते हो... दिलीप कुमार पांडेय।
25. क़त्ल कर, सीना तान कर चल...
यूं ही, सरताज नहीं बना करते... ।
सर-अंजाम की फिक्र उसे कहां...
जान लेते, तो कफ़न भी ले आते.... दिलीप कुमार पांडेय।
26. दिलों के मिलने की बात ना कीजिए...
ज़माना लेनदेन का है...
बाज़ार-ए-इश्क में खरीदार तो हैं...
क़द्रदानों की बात ना कीजिए... दिलीप कुमार पांडेय।
27. सुलह की हर कोशिश बेकार गयी...
उसके शहर में पनाह ना मिला...
बात जान देने की भी आयी...
पर ना ख़ंजर, ना ही क़त्लगाह मिला... दिलीप कुमार पांडेय।
28. ना मयखाना देखा, ना पैमाने का शौक...
फिर जाने ये बेखबरी क्यों...
होश आया तो मालूम हुआ....
उसकी आंखों में मैंने शराब देखी थी... दिलीप कुमार पांडेय।
29. जाने किस दिशा जाएंगे हम...
आज 'हवा' का मिजाज बदला-बदला सा है... दिलीप कुमार पांडेय।
30. हम दिलों जान से चाहते हैं...
बर्षों तक उन्हें पता ना चला।
ज़ुबां के चंद अल्फ़ाज क्या निकले...
कदमों में वो जहां लुटा बैठे.... दिलीप कुमार पांडेय।
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