Friday, July 9, 2010

मीना कुमारी की ग़ज़ल

दोस्तों, मैं आज जो ग़ज़ल पोस्ट करने जा रहा हूँ इसे गाया मीना कुमारी ने हैमैं इस ग़ज़ल को पोस्ट कर रहा हूँ. अगर मौका लगे तो आप इसे एक बार सुनें जरूर यही गुज़ारिश करूंगा
यूँ तेरी रहगुज़र से, दीवानावार गुजरे
काँधे पे अपने रखकर अपना मज़ार गुजरे

बैठे हैं रास्ते में दिल का खंडहर सजाकर
शायद इसी तरफ से, एक दिन बहार गुजरे

बहती हुई ये नदिया, घुलते हुए किनारे
कोई तो पार उतारे, कोई तो पार गुजरे

तुने भी हमको देखा, हमने भी तुमको देखा
तुम दिल ही हार बैठे, हम जान हार गुजरे

No comments:

Post a Comment